रामायण में कितने कांड है?

रामायण एक प्राचीन भारतीय महाकाव्य कविता है, जो 5000 साल पहले लिखी गई थी। रामायण की रचना मूल रूप से महान ऋषि वाल्मीकि द्वारा संस्कृत में की गई थी। श्री रामचरितमानस (तुलसीकृत रामायण) हिंदी साहित्य की अमूल्य निधि है। इस महाकाव्य की रचना संत तुलसीदास द्वारा 16वीं शताब्दी में ‘अवधी भाषा’ में की गई थी। हिंदी भाषियों के बीच यह रामायण (Ramayan)  के रूप में ही प्रसिद्ध है।
रामायण में कितने कांड है?

रामायण में कितने कांड है?

रामायण में कुल सात कांड है वह निम्लिखित अनुसार है -

  1. बालकांड 
  2. अयोध्याकांड 
  3. अरण्यकांड 
  4. किष्किन्धाकांड
  5. सुन्दरकांड 
  6. लंकाकांड / युद्ध कांड
  7. उतरकांड
1. बालकांड - रामायण की अध्याय से होती है। जैसा कि नाम से पता चलता है, यह अध्याय राजकुमार राम के बचपन के बारे में है। इस कांड में श्री राम के जन्म और बाल्यकाल की कथा वर्णित है। तथा बचपन में उनके तमाम किस्से कहानियों के ऊपर छवि डाली गयी है। इसमें कुल 361 दोहे हैं।

2.अयोध्याकांड - इस अध्याय में बाल्य अवस्था से निकल राम एवं उनके भाइयों द्वारा अयोध्यावास की कहानियाँ वर्णन है। राम शिव के धनुष को तोड़ने और जनकपुरी राजकुमारी सीता से शादी करने जैसी कहानियाँ शामिल है। इस कांड में 326 दोहे हैं। 

3. अरण्यकांड - राम का सीता लक्ष्मण सहित वन-गमन मारीचि-वध और सीता-हरण की कथा का वर्णन अरण्यकांड में हुआ है। अरण्य काण्ड का शाब्दिक अर्थ है राम, लक्ष्मण और सीता का वनवास या वन में जीवन का वर्णन, जिसके दौरान कई घटनाएं घटीं उनका वर्णन है। इसमें 46 दोहे हैं।

4. किष्किन्धाकांड - इस अध्याय में सीता की खोज के क्रम में किष्किंधा-नगरी में हनुमान से भेंट, सुग्रीव से मित्रता, बाली-वध, सुग्रीव का राज्यारोहण आदि घटनाओं का वर्णन है। इसमें 30 दोहे हैं।

5. सुन्दरकांड - सुंदरकांड का रामायण में विशेष महत्व है। इस कांड में हनुमान द्वारा समुद्र लांघकर लंका जाने, सीता को ढ़ूंढ़ कर मिलने, राम का संदेश देने, अशोक-वाटिका उजाड़ने, लंका-दहन, राम-विभीषण मैत्री आदि का वर्णन है। इसमें 60 दोहे हैं।

6. लंकाकांड / युद्ध कांड - इस अध्याय में राम-रावण युद्ध, रावण की मृत्यु, सीता की रावण की कैद से मुक्ति, अग्नि-परीक्षा, पुष्पक विमान पर आरूढ़ होकर अयोध्या-आगमन, स्वागत में दीपोत्सव का आयोजन आदि घटनाओं का वर्णन है। इसमें कुल 121 दोहे हैं।

7. उतरकांड - राम की ताजपोशी, राम राज्य की स्थापना, लभ एवं कुश का जन्म, सीता की अग्नि परीक्षा, माँ सीता का जमीन में समा जाना एवं राम की जल समाधी को अंकित करते इस अध्याय से रामायण का अंत होता है। यह राम-कथा का उपसंहार है। इस कांड में 130 दोहे हैं। 

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