दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध के कारण, घटनाएँ और परिणाम (1848-49)

दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध का विशेष ऐतिहासिक महत्व है। इसके परिणामस्वरूप महाराजा रणजीत सिंह द्वारा अथक प्रयासों, परिश्रम और सक्षमता के साथ स्थापित किए गए सिख साम्राज्य का अंत हो गया। उनका पुत्र महाराज दलीप सिंह अंग्रेजों का पेंशनर बन गया। कोहिनूर नामक एक बहुमूल्य हीरा ब्रिटिश महारानी विक्टोरिया को भेंट कर दिया गया और लाहौर दरबार की सारी संपत्ति और राज्य पर अंग्रेजों का कब्ज़ा हो गया। पंजाब में तीन अंग्रेज़ अधिकारियों पर आधारित प्रशासनिक समिति (Board of Administration) की स्थापना की गई। पंजाब में दस सालों की (1839-49) की अराजकता और गड़बड़ी के बाद इस प्रशासनिक समिति ने शांति और अमन-चैन स्थापित किया। इस ने कई प्रशासनिक सुधार और लोगों की भलाई के लिए काम किए। दूसरे सिख युद्ध के नतीजों का संक्षिप्त विवरण नीचे दिया गया है।

दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध के कारण, घटनाएँ और परिणाम

  1. महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का अंत - महाराजा रणजीत सिंह ने बड़ी कुशलता, बुद्धिमत्ता, साहस और प्रयासों से स्वतंत्र खालसा राज्य की स्थापना की। उनकी मृत्यु के दस साल बाद ही उसके राज्य में अराजकता फैला गई। उसके अयोग्य उत्तराधिकारी राज्य के पतन को रोक नहीं सके। प्रथम सिख युद्ध के परिणामस्वरूप, उनके राज्य के काफी हिस्सों पर अंग्रेजों का कब्ज़ा हो गया था। गुलाब सिंह के अधीन कश्मीर का एक स्वतंत्र राज्य स्थापित हो गया। दूसरे सिख युद्ध के बाद रणजीत सिंह का राज्य का पूरी तरह से अंत कर दिया गया। 29 मार्च, 1849 ई. को लाहौर दरबार में पढ़ें गए गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौज़ी के घोषिणापत्र ने, सिख राज्य का अंत कर दिया। अंतिम सिख महाराजा दलीप सिंह को सिंहासन से हटा कर, 4-5 लाख रुपये की वार्षिक पेंशन तय कर दी गई। उसको इंग्लैंड भेज दिया गया। वहाँ उसने ईसाई धर्म को कबूल कर लिया, लेकिन बाद में भारत लौटने पर उसने सिख धर्म में वापस अपना लिया। सिख राज्य की सारी संपत्ति और कोहिनूर हीरे पर अंग्रेज़ों का कब्ज़ा हो गया।
  2. पंजाब को ब्रिटिश साम्राज्य में मिलाना - दूसरे सिख युद्ध में सिखों की हार से महाराजा रणजीत सिंह की यह भविष्यवाणी कि "सब लाल हो जाएगा" (पंजाब ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा बन जाएगा) सच हो गई। 29 मार्च, 1849 ई. को जारी किए गए गवर्नर जनरल के घोषणापत्र में कहा गया - ‘पंजाब के राज्य को खत्म किया जाता है और महाराजा रणजीत सिंह के सभी प्रदेश अब और भविष्य में भारत में ब्रिटिश साम्राज्य का हिस्सा होंगे।’ पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाना, अन्य राज्यों में से सब से बाद में हुआ था। इसको मिलाने से भारत में अंग्रेजी शक्ति अपनी चरम सीमा पर पहुँच गई।
  3. ब्रिटिश साम्राज्य की प्राकृतिक सीमा - पंजाब के मिलाने से ब्रिटिश साम्राज्य को उत्तर पश्चिम में प्राकृतिक सीमा मिल गई। अब इस दिशा में उसकी सीमा सोलोमन पर्वत माला को छूने लगी। अंग्रेजों का अफगानिस्तान के साथ सम्पर्क हो गया। अब वे भविष्य में रूस की विस्तारवादी नीति को भी प्रभावशाली रूप से रोक सकते थे।
  4. मूल राज और महाराज सिंह को सजा - दीवान मूल को एग्न्यू और एंडरसन की मृत्यु के दोश में पहले मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन बाद में काला पानी की सजा सुनाई गई। इसी तरह दूसरे एक सिख विद्रोही महाराज सिंह को भी सिंगापुर भेजने की सजा दी गई। जब इन्हें ले जाया जा रहा था तो कलकत्ता में अगस्त, 1851 ई. में बीमारी के कारण मूल राज की मौत हो गई। महाराज सिंह की जुलाई, 1856 ई. में सिंगापुर में उनकी मृत्यु हो गई।
  5. सरदारों की शक्ति का दमन - द्वितीय सिख युद्ध के बाद अंग्रेजों ने यह महसूस किया कि सिख सरदारों और जागीरदारों की शक्ति का दमन करना अति जरूरी है न तो अंग्रेजी सरदार के विरुद्ध उनके विद्रोह का डर बना रहेगा। इस लिए उनकी जागीरें और संपत्ति जब्त कर ली गई। इससे सरदारों की शक्ति और प्रभाव शून्य हो गया।
  6. सिख सेना का विघटन - पहले सिख युद्ध के बाद लाहौर की संधि द्वारा सैनिकों की संख्या बहुत कम कर दी गई थी। बाद में सिख सेना की तनख्वाह भी कम कर दी गई। दूसरे युद्ध के बाद भी अंग्रेज़-सिख सेना से डरते रहे। सिख सैनिक भविष्य में किसी भी विद्रोही सरदार का साथ दे सकते थे। ऐसी किसी भी संभावना का अंत करने के लिए अंग्रेजों ने सिख सेना को भंग (Disbanded the Sikh army) कर दिया। बाद में कुछ सिख सैनिकों को अंग्रेजी सेना में भर्ती कर लिया गया।
  7. पंजाब की प्रशासनिक व्यवस्था - द्वितीय सिख युद्ध के बाद पंजाब को अंग्रेजी साम्राज्य में मिलाने से इस राज्य की प्रशासनिक जिम्मेदारी भी अंग्रेजों पर आ गई। इस के लिए तीन मैंबर (हेनरी लॉरेंस, जॉन लॉरेंस और चार्ल्स मैंसल (Charles Mansel) पर आधारित शासन प्रबन्ध समिति का संगठन किया गया। इसके अध्यक्ष हेनरी लॉरेंस (Henry Lawrence) को बनाया गया था। यह प्रणाली 1849 ई. से लेकर 1853 ई. तक रही। 1853 ई. में इस बोर्ड को खत्म करके जॉन लॉरेंस को पंजाब का चीफ़ कमिश्नर बनाया गया।
  8. पंजाब में शांति, अमन चैन और खुशहाली - रणजीत सिंह की मृत्यु (1839 ई.) के बाद पंजाब में अराजकता, गड़बड़ी और मारधाड़ का बाजार गर्म रहा। द्वितीय सिख युद्ध के बाद अंग्रेजों ने यहां कई प्रशासनिक सुधार और जन-कल्याणकारी कार्य करके शांति, अमन चैन और खुशहाली लाने में सफलता प्राप्त की। शिक्षा, कला और व्यवसाय का पुनर्विकास होने लगा।
  9. पंजाब में अंग्रेज अधिकारी - पंजाब पर अंग्रेजों के कब्जे के बाद अनेक उच्च-सरकारी पदों पर हिंदू, मुस्लिम और सिखों के स्थान पर ब्रिटिश अधिकारियों की नियुक्ति होने लगी। उन्हें अच्छा वेतन और भारी भत्ता दिया जाता था।
  10. पंजाब में प्रशासनिक सुधार - अंग्रेजों ने पंजाब के प्रशासनिक ढांचे में कई बदलाव किए। एक कुशल पुलिस प्रणाली और एक अच्छी न्यायपालिका स्थापित की गई। राज्य में सड़कों और नहरों का जाल बिछा दिया गया। आधुनिक डाक प्रणाली को भी इस राज्य में शुरू किया गया। कृषि (खेती) विकास को भी प्रोत्साहित किया गया। लड़कियों को मारने की प्रथा को रोकने के लिए प्रयास किए गए। पंजाब में पश्चिमी ढंग की शिक्षा प्रणाली भी शुरू की गई।
  11. पंजाब में 1857 ई. के विद्रोह में वफादार रहना - 1857 ई. में उत्तरी भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ एक शक्तिशाली विद्रोह शुरू हो गया। इस विद्रोह में सही अर्थों में पंजाब अंग्रेजों के प्रति वफादार रहा। इसका एक मुख्य कारण यह था कि अंग्रेजों के प्रशासनिक सुधारों और प्रजा के कल्याण के कार्यो के कारण लोग ब्रिटिश शासन प्रणाली को प्यार करने लगें थे। अंग्रेजों का देशी रियासतों के शासकों के साथ अच्छे व्यवहार के कारण, इन शासकों ने विद्रोह के समय अंग्रेजों की मदद की।
  12. पंजाब की रियासतों के साथ प्रति मित्रतापूर्ण रवैया - दूसरे सिख युद्ध के बाद अंग्रेजों ने रणजीत सिंह के राज्य तो ब्रिटिश साम्राज्य में मिला लिया, लेकिन उन्होंने कपूरथला, पटियाला, नाभा, जींद और मालेरकोटला आदि राज्यों के अस्तित्व की सुरक्षा अपने नीचे बनई रहने दी। इन रियासतों के शासकों ने इसी कारण 1857 ई. के विद्रोह में अंग्रेजों का साथ दिया।

इसलिए हम देखते है कि द्वितीय सिख युद्ध ने पंजाब की राजनीतिक स्थिति, यहां के लोगों के जीवन और प्रशासनिक प्रणाली को बहुत प्रभावित किया। इसके कारण रणजीत सिंह द्वारा स्थापित खालसा राज्य का हमेशा के लिए अंत हो गया।

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