बंदा सिंह बहादुर की मुख्य सफलताओं के कारण

बंदा बहादुर केवल 25 सिखों के साथ नांदेड़ से चलें थे। गुरु साहिब के हुक्मनामों और उनकी मुख जीतो ने पंजाब के विभिन्न हिस्सों में बिखरे सिखों को उसका साथ देने करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने सोनीपत, कैथल, समाना, घुरम, कपूरी, साढौरा, चप्पर चिरी (सरहिंद) गंगा-जमना दोआब, पंजाब का पहाड़ी क्षेत्र और बटाला, गुरदासपुर और पठानकोट के आसपास के क्षेत्रों में कई सैन्य कार्रवाईयो में सफलता प्राप्त की। उससे उत्साहित होकर दोआबा, जालंधर और माझा के क्षेत्रों पर भी सिखों का कब्जा हो गया। उसने मुखलिस्थान को अपने राज्य की राजधानी बनाया। उनकी इन सफलताओं के कई कारण थे :-

बंदा सिंह बहादुर की मुख्य सफलताओं के कारण

  1. सबसे पहले तो इन सफलताओं का श्रेय बंदा बहादुर के कुशल सैन्य नेतृत्व और उनकी बहादुरी और हिम्मत को जाता है। उन्होंने स्वयं युद्ध में भाग लेते थे और युद्ध को सक्षम रूप से संचालित करते थे। बंदा सिंह के साहस एक परबत की तरह अजेय और महान था।
  2. गुरु साहिब के हुकमनामों के कारण, कई सिख सरदार और सिख संगत बंदा बहादुर के साथ मिल गई। इस सहयोग से बंदा बहादुर की शक्ति और साहस बहुत बढ़ गया। ऐसा लग रहा था कि उनके नेतृत्व में पूरी सिख संगत मुगलों के खिलाफ खड़ी हो गई हों।
  3. औरंगजेब की मृत्यु के बाद, मुग़ल कमजोर पड़ने लगे। उसके उत्तराधिकारी आपस में राज्य गद्दी के लिए लड़ रहे थे। वे सिखों का शक्तिशाली तरीके से मुकाबला करने में असमर्थ थे। उनकी पकड़ पंजाब में कमजोर हो रही थी। बंदा बहादुर ने इसका पूरा फायदा उठाया।
  4. बंदा बहादुर एक उच्च कोटि का प्रशासक था। उसने अपने राज्य को अलग-अलग हिस्सों में बांट कर, उनके शासन का कार्य सक्षम सिख अधिकारियों को सौंप दिया। इससे राज्य की शक्ति संगठित हो गई। राजधानी मुखलिसपुर से राज्य की सभी गतिविधियों का संचालन किया जाता था। जमींदारी प्रथा का अंत करके भी उन्होंने पंजाब के किसानों का दिल जीत लिया। उनके प्रशासन की लोकप्रियता उनकी सैनिक सफलताओं के लिए बहुत मददगार साबित हुई।
  5. सिखों हर लड़ाई में धार्मिक जोश से लड़ते थे। उनके सामने जुल्म के खिलाफ संघर्ष जारी रखने का उच्च आदर्श था। इसमें उनकी सफलता का राज इसमें छिपा था।
  6. बंदा बहादुर का पवित्र, त्यागी जीवन बतीत करना और उसकी सभी सफलताओं का श्रेय गुरु साहिब को देना आदि कारणों के कारण वह अपने पैरोंकार के लिए एक उच्च आदर्श और चानण-मुन्नारा बन गया। वो उसके लिए हर संभव कोशिश करने के लिए तैयार थे।
  7. मुगल अधिकारियों द्वारा लोगों का शोषण, रिश्वतखोरी और जनता पर उनके द्वारा किए गए अत्याचारों के कारण, इन युद्धों में आम लोगों की उनके प्रति कोई हमदर्दी नहीं थी। दूसरी तरफ़ बंदा बहादुर के सैनिकों ने वे मुक्तिदाता (The Liberators) मानते थे। इसलिए वह उन्होंने पूरा सहयोग देते थे।
  8. बंदा बहादुर द्वारा जमींदारी प्रथा का अंत कर देने से बहादुर किसानों की हमदर्दी बंदा बहादुर जी को मिली हुई थी। वो बड़ी संख्या में उनके साथ मिल कर युद्ध में शामिल होने लगें। उनकी हिम्मत, लड़ाई की भावना और शारीरिक ताकत बंदा बहादुर के लिए बहुत उपयोगी साबित हुई।
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