अंत में बंदा सिंह बहादुर असफल क्यों हुए और इसके के क्या कारण थे?

बंदा बहादुर ने अपने सैन्य जीवन में कई सैन्य सफलताएं हासिल कीं, लेकिन मुगल शासकों बहादुर शाह और फर्रुखसियर ने उसे कुचलने के लिए कई ठोस कदम उठाए। बंदा बहादुर जी को पहले सडोरा और मुखलिसपुर में उसको हार का सामना करना पड़ा। उसने नाहन की पहाड़ियों में शरण ली। बाद में 1715 ई. में वो गुरदास नंगल की लड़ाई में हार गया, पकड़ा गया और 1716 ई. में दिल्ली में शहीद कर दिया गया। कई सफलताओं के बावजूद, अंत में उनकी विफलता के कई कारण थे :-

अंत में बंदा सिंह बहादुर असफल क्यों हुए और इसके के क्या कारण थे?

  1. बंदा बहादुर के संसाधन बहुत सीमित थे। मुगलों के मुकाबले में उसके पास न तो ज्यादा पैसा था, न सैनिक और न हथियार।
  2. बंदा बहादुर की तुलना में मुगल साम्राज्य एक बहुत बड़ी शक्ति थी जिसका साम्राज्य लगभग पूरे भारत में फैला हुआ था। उसके पास लाखों सैनिक, असीमित हथियार, गोला-बारूद और आर्थिक संसाधन थे। उसके पास प्रशिक्षित सैनिकों और सेनापतियों की कोई कमी नहीं थी। मुग़ल अधिकारियों की पंजाब की मुस्लिम जनता भी बहुत मदद करती थी। जिहाद (धार्मिक युद्ध) के समय अमीर मुसलमानों ने मुग़ल सैनिकों की हर तरह से मदद की।
  3. मुगल बादशाहों - बहादुर शाह और विशेष रूप से फारुखसियार ने सिखों की शक्ति को कुचलने के लिए, एक विशाल योजना बनाई। उन्होंने पंजाब और उसके पड़ोसी देशों के सभी उच्च अधिकारियों को बंदा बहादुर जी के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का आदेश दिया। इससे पूरे मुस्लिम समुदाय सिखों के खिलाफ खड़ा हो गया। इतने बड़े संघर्ष के लिए सिखों के पास न तो साधन थे और न ही शक्ति।
  4. लाहौर के नए गवर्नर अब्दुस समद खान ने मुग़ल सेना और मुस्लिमों को सिखों के खिलाफ संगठित किया। उन्होंने बहुत अच्छी योजना के साथ सिखों को एक ही जगह पर केंद्रित करके (गुरदास नांगल में) अपनी सैनिक चाल में फँसा लिया।
  5. बंदा बहादुर में जीतों के कारण अहंकार आ गया था। यह कहावत तो सच ही हुई कि “अहंकारी का सिर नीवा”। वो अपने सहयोगी सरदारों की परवाह नहीं की और अपनी मनमानी करने लगा। इससे सिखों में द्रार पड़ गई और सिख संगठन को बहुत नुकसान हुआ।
  6. लाला दुनी चंद की हवेली कोई किला नहीं थी। इस में एक शक्तिशाली मुगल सेना के घेरे से सुरक्षित रहना कोई आसान काम नहीं था।
  7. लाला दुनी चंद की हवेली पर मुगलों ने अचानक हमला करके बंदा बहादुर को मुश्किल में डाल दिया। उसमें खाना-पानी बहुत कम था। कितनी देर तक (8 महीने) एक विशाल सेना का, भूखे-प्यासे सिख, सामना कर सकते थे। अंत में उन्हें बाहर जाकर मुगलों से लड़ना पड़ा। ऐसी स्थिति के लिए उस समय सिख सैनिक बिल्कुल तैयार नहीं थे।
  8. गुरदास नंगल की लड़ाई के दौरान, बाबा विनोद सिंह और बंदा बहादुर के बीच बहुत मतभेद पैदा हो गए। इन मतभेदों ने सिख शक्ति को कमजोर कर दिया। बाबा विनोद सिंह हवेली छोड़कर बाहर चले गए। इस कारण बचें हुए सिखों का मनोबल गिर गया। जाहिर है, उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा।
  9. दुनी चंद की हवेली को मुगल सैनिकों ने आठ महीने तक घेर रखा था। अंदर का सारा खाना-पानी खत्म हो गया। सिखों को घांस-फूस, पेड़ की छाल-पत्ते और जानवरों का मांस और हड्डियां खा कर अपने पेट की आग बुझानी पड़ी। इन मुसीबतों के कारण वो शारीरिक और मानसिक रूप से कमज़ोर हो गए। यह भी बंदा बहादुर की असफलता का मुख्य कारण बना।
  10. हिंदू जनता और पहाड़ी प्रदेशों के हिंदू राजाओं ने बंदा बहादुर की मदद नहीं की, जबकि दूसरी तरफ सारी मुस्लिम जनता उनके खिलाफ खड़ी थी। इस लिए यह भी अंत में उसकी असफलता का एक प्रमुख कारण बनी।
  11. सिखों में अनुशासन और संगठन की कमी के कारण भी हार का सामना करना पड़ा।
  12. कुछ इतिहासकारों का मत है कि बंदा बहादुर ने गुरु साहिब द्वारा दिए गए पाँच आदेशों का उलंघन किया। यह भी उनकी हार का एक बड़ा कारण बना।
  13. अब्दुसमद खान ने गुरदास नंगली की लड़ाई में बंदा बहादुर को आश्वासन दिया था कि यदि
  14. वह हवेली छोड़ देगा, उसे शांति से जाने दिया जाएगा, लेकिन जब बंदा बहादुर और उसके साथी बाहर निकले, तो मुगल सेना ने उस उपर हमला कर दिया। इस लड़ाई में 8000 सिख मारे गए। अब्दुसमद द्वारा यह विश्वासघात भी बंदा बहादुर की हार का मुख्य कारण बना था।
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