पंजाब का इतिहास और ऐतिहासिक नाम

पंजाब को प्राचीन काल से विभिन्न नामों से जाना जाता है। पंजाब शब्द फारसी भाषा के ‘पंज’और ‘आब’ दो शब्द से बने है। इसका मतलब है कि इस धरती का जन्म हिमालय परबत से निकली पाँच नदियों - सतलज, ब्यास, रावी, चिनाब और झेलम द्वारा लाई गई उपजाऊ मिट्टी से हुआ है।
पंजाब का इतिहास
ऋग्वेद में इस प्रदेश के लिए 'सप्त सिंध' नाम लिखा गया है। इसका मतलब है सात नदियाँ (सतलुज, ब्यास, रवि, चिनाब, झेलम, सिंधु और सरस्वती) की भूमि। महाकाव्य (रामायण और महाभारत) और पुराणों में इसे पंचनाद (पांच नदियों की भूमि) कहा जाता है। यूनानियों ने इसे पेंटापोटामिया (Pentapotamia) का नाम दिया। इसका अर्थ पांच नदियों की भूमि भी है। कुछ समय के लिए इस देश का यह नाम इसलिए भी जारी रहा क्योंकि ‘टक’ नामक कवीला रहता था। 

मध्य युग में पंजाब के एक बड़े क्षेत्र के लिए ‘लाहौर सूबा’ (Lahore Province) और महाराजा रणजीत सिंह के समय इसे कारण ‘लाहौर राज’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था। 1849 ई. जब अंग्रेजों ने सिख राज्य को अंग्रेजी साम्राज्य में शामिल कर लिया, तो उन्होंने इसका नाम बदलकर पंजाब प्रांत रख दिया। इसमें कई देसी रियासतें (पटियाला, कपूरथला, नाभा, जींद, फरीदकोट और मालेरकोटला) आदि शामिल थे। 1857 ई. क्रांति के बाद दिल्ली और हिसार को पंजाब प्रांत का हिस्सा भी बना दिया था।

1901 ई. इसके उत्तर-पश्चिम के हिस्सों को अलग करके उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (North-West Frontier Province) बनाया गया था। यहां से पंजाब का आकार घटने लगा। 1911 ई. में दिल्ली को पंजाब से अलग कर दिया गया। 1947 ई. देश के वंड के समय, पंजाब दो भाग हो गये - पूर्व पंजाब और पश्चिमी पंजाब (पाकिस्तान)। 1966 ई. में पंजाब राज्य के गठन के समय हिमाचल और हरियाणा राज्यों को बनाने के लिए कुछ भागों को अलग किया गया।

वास्तव में, जब हम इतिहास के संदर्भ में बात करते है। तो हमारा इरादा आधुनिक पंजाब से नहीं बल्कि विभाजन से पहले के उस पंजाब से है जिसकी उत्तरी सीमा जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पश्चिमी सीमा अफ़गानिस्तान और बलोचिस्तान, पूर्व सीमा जमना नदी और दक्षिण सीमा राजस्थान से लगती थी

दोस्तों आज इस पोस्ट में हमनें आपको पंजाब का इतिहास और अलग-अलग नाम के बारे में जानकारी दी है। उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। अगर आपका कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट बाक्स में पुछ सकते हो।

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