बाबर के पंजाब पर हमले और जीत

भारत की धन-दौलत, लोधी सरदारों की आपसी फूट, दौलत का लोधी, आलम का लोधी और रनजीत राणा के बुलावे, भारत की राजनीतिक और सैनिक कमजोरी और बाबर की उच्च अभिलाषा आदि कुछ ऐसे कारण है जिनके कारण बाबर ने पंजाब पर अधिकार करके दिल्ली जीतने की योजना बनाई। बाबर बहुत ही सक्षम शासक और सक्षम सेनापति था। उसने धीरे-धीरे अपनी योजना को अमल में लाया। उसने पंजाब पर पांच बार हमला किया।

बाबर के पंजाब पर हमले और जीत

पहला हमला 

सबसे पहली बार उसने अप्रैल, 1519 ई में पंजाब के सीमा क्षेत्र में हमला किया और भेरा और बजौर के किले पर कब्जा कर लिया। उसने अपने एक दूत मुला मुर्शीद को इब्राहिम लोधी के पास इस संदेश के साथ भेजा कि पंजाब बाबर के पूर्वज तैमूर के साम्राज्य का हिस्सा था, इसलिए इसे बाबर को सौंप दिया जाना चाहिए, लेकिन इब्राहिम ने इनकार कर दिया।

दूसरा हमला 

दुसरी बार सितंबर, 1519 ई में बाबर ने पंजाब पर हमला किया। खैबर दर्रे को पार करने के बाद, बाबर ने पेशावर पर कब्जा कर लिया, लेकिन बदखशा में विद्रोह के कारण बाबर को पीछे हटना पड़ा।

तीसरा हमला

तीसरी बार 1520 ई में बाबर ने पंजाब पर हमला किया। भेरा के बाद उसने सियालकोट पर अधिकार कर लिया। आगे बढ़कर सैयदपुर (ऐमनाबाद) के लोगों के कत्लेआम और लूट-मार का आदेश दिया क्योंकि उनहोंने उसका विरोध था। गुरु नानक देव जी और उनके एक साथी मर्दाना को 30,000 अन्य लोगों के साथ कैदी बना लिया गया। गुरु साहिब ने बाबर के इस हमले की तुलना पापों की जंझ (Bridal of Procession of sins) से की है। वह लिखते हैं कि पापों की जंझ ने साथ काबुल से आकर बलपूर्वक दुल्हन (भारत रूपी) का हाथ मांगा। शांति और धर्म गायब हो गए और झूठ प्रधान बन गया। लेकिन गुरु की आध्यात्मिक शक्ति से प्रेरित होकर, बाबर ने उसे रिहा कर दिया और माफी मांगी।

चौथा हमला

चौथी बार 1524 ई में, बाबर ने पंजाब पर फिर से हमला किया। इस बार उसे दौलत खा लोधी और आलम खा लोधी ने बुलावा भेजा था। बाबर ने लाहौर इब्राहिम द्वारा भेजे गए जनरल बहार खा को हराया और शहर को खूब लुटा। उसने दीपालपुर को भी लूट लिया।  यहां दौलत खान लेधी उनसे मिले। बाबर ने उसे जालंधर और सुल्तानपुर का इलाका दिया और लाहौर को अपने पास रख लिया। इसने दौलत खान को चिंतित किया क्योंकि वह खुद पूरे पंजाब का स्वतंत्र शासक बनना चाहता था।  उसने शिवालिक की पहाड़ियों में शरण ली। बाबर दीपालपुर का प्रदेश आजम खा लोधी को और लाहौर को एक मुगल अधिकारी अधीन संभाल कर खुद काबुल वापस चला गया।

पाँचवाँ हमला

पाँचवीं बार पूरी तैयारी में, बाबर ने 1525 ई में भारत पर हमला किया। दौलत खा लौधी ने आलम खा लोधी को दीपालपुर से भगा दिया था। बाबर ने दौलत खा को मलोट (होशियारपुर के पास) पराजित किया और उसे कैदी लिया, लेकिन उदारता से उसे माफ कर दिया। जब उसे भेरा की तरफ ले जाया जा रहा था तो रसते में दौलत खा की मृत्यु हो गई। लाहौर पर पूर्ण नियंत्रण हासिल करने के बाद, बाबर आगे बढ़कर और इब्राहिम लोधी द्वारा भेजे गए अगली फौजी टुकड़ी को हराया। वह दिल्ली की ओर बढने लगा। पानीपत की पहली लड़ाई में बाबर और इब्राहिम लोधी के बीच एक निर्णायक युद्ध हुआ, जिसमें बाबर ने अपने 25,000 सैनिकों को विशेष वैज्ञानिक तरीके से युद्ध के मैदान में तैनात किया था। दुसरी तरफ इब्राहिम ने पुराने ढंग के अनुसार अपनी एक लाख सेना को खड़ा कर दिया।

बाबर के सैन्य अनुभव, कुशल नेतृत्व, साहस और उसकी वैज्ञानिक युद्ध योजना और तोपखाने के सामने इब्राहिम की सेना नहीं टिक सकी। इब्राहिम लोधी युद्ध में मारा गया। उसकी सेना युद्ध के मैदान से भागने लगी। आगे बढकर बाबर ने दिल्ली और आगरा पर कब्जा कर लिया और इस तरह पंजाब मुगलों के हाथों में आ गया।  बाबर के उत्तराधिकारी हुमायूँ के अधीन पंजाब 1530 ई से 1540 ई तक रहा। फिर इस पर शेरशाह सूरी का अधिकार हो गया।  1555 ई में, हुमायूँ ने फिर पंजाब पर अधिकार कर लिया और दिल्ली का शासक बन गया। 1556 ई से 1799 ई तक लाहौर प्रांत दिल्ली के मुगल साम्राज्य का एक हिस्सा बना रहा। इसी दौरान 12 मिसल राज्य स्थापित हुए और 1799 ई में, यह प्रांत महाराजा रणजीत सिंह के साम्राज्य का हिस्सा बन गया।

दोस्तों आज इस पोस्ट में हमनें आपको बाबर के पंजाब पर हमले और जीत के बारे में बताया है। उम्मीद है कि आपको यह पोस्ट पसंद आई होगी। अगर आपका कोई सवाल है तो आप नीचे कमेंट बाक्स में पुछ सकते हो।

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