दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध के कारण, घटनाएँ और परिणाम (1848-49)

दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध का विशेष ऐतिहासिक महत्व है। इसके परिणामस्वरूप महाराजा रणजीत सिंह द्वारा अथक प्रयासों, परिश्रम और सक्षमता के साथ स्थापित किए गए सिख साम्राज्य का अंत हो गया। उनका पुत्र महाराज दलीप सिंह अंग्रेजों का पेंशनर बन गया। कोहिनूर नामक एक बहुमूल्य हीरा ब्रिट…

और पढ़ें

प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध के कारण, घटनाएँ और परिणाम (1845-46)

सबराव की लड़ाई (20 फरवरी, 1846) में लाल सिंह और तेज सिंह की विश्वासघात के कारण सिख सेना आखिर अंत में पराजित हो गई। शाम सिह अटारी वाला वीरता से लड़ते हुए शहीद हो गए। इस लड़ाई में 3125 सिख सैनिक मारे गए। तेज सिंह ने रणभूमि में से भागते समय सतलज नदी पर बनाये गए नावों के प…

और पढ़ें

दूसरे आंग्ल-सिख युद्ध के कारण | Second Anglo Sikh War In Hindi

दूसरे एंग्लो सिख-युद्ध का मूल कारण अंग्रेजों की विस्तारवादी नीति थी। पहले सिख युद्ध के बाद उन्होंने कुछ सैन्य और आर्थिक कारणों के परिणामस्वरूप पंजाब को अपने साम्राज्य में नहीं मिलाया था, फिर भी उनकी गिद्ध जैसी आँखें इस पर टिकी थी। खालसा सेना में बदले की भावना बड़ी तीव्…

और पढ़ें

प्रथम आंग्ल-सिख युद्ध के कारण

महाराजा रणजीत सिंह की मृत्यु (जून, 1839 ई.) के बाद पंजाब में उथल-पुथल और राजनीति अस्थिरता का माहौल पैदा हो गया। उनके उत्तराधिकारी (खरक सिंह, नौनिहाल सिंह, रानी चंद कौर और शेर सिंह और दलीप सिंह) में से कोई भी इतना योग्य साबित नहीं हुआ कि वो महाराजा के साम्राज्य को संभाल…

और पढ़ें

पंजाब के इतिहास के निर्माण में समस्याएं

पंजाब के इतिहास की रचना करने वाले इतिहासकारों को कई कठिनाइयों और समस्याओं का सामना करना पड़ा। भारतीयों द्वारा इतिहास लेखन में रुचि न लेने के कारण आधुनिक इतिहासकारों के लिए, पंजाब ही नहीं बल्कि पूरे भारत के इतिहास की रचना करने में बहुत कठिनाईयां पैदा हुई। अलबरूनी (Alb…

और पढ़ें

पंजाब की भौगोलिक स्थिति और विशेषताएं

पंजाब की भौगोलिक विशेषताओं  का समुचित अध्ययन करने से पहले, हमें इसकी सीमाएँ से जागरुक होना बहुत जरूरी है। इस संबंध में कई विचार प्रस्तुत किए जाते है। (i) उत्तर पश्चिम भारत का वह भाग पंजाब है, जो 6 नदियों और हिमालय के संगम के बीच स्थित है। (ii) पाँच दोआबों (दोआब बिष्ट ज…

और पढ़ें

अंत में बंदा सिंह बहादुर असफल क्यों हुए और इसके के क्या कारण थे?

बंदा बहादुर ने अपने सैन्य जीवन में कई सैन्य सफलताएं हासिल कीं, लेकिन मुगल शासकों बहादुर शाह और फर्रुखसियर ने उसे कुचलने के लिए कई ठोस कदम उठाए। बंदा बहादुर जी को पहले सडोरा और मुखलिसपुर में उसको हार का सामना करना पड़ा। उसने नाहन की पहाड़ियों में शरण ली। बाद में 1715 ई.…

और पढ़ें